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कोरबाक्राइमछत्तीसगढ़

पोड़ी उपरोड़ा : कुटेशर नगोई में नाले के पानी को लेकर विवाद मनरेगा से बने बांध के बाद नाले का बदला बहाव! किसानों की फसल प्रभावित होने का आरोप, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग

 

 

न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)

कोरबा/पोड़ी-उपरोड़ा। पोड़ी-उपरोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत कुटेशर नगोई, पटवारी हल्का नंबर 39 में नाले के पानी के बहाव को लेकर ग्रामीणों और किसानों की परेशानी सामने आई है। इस संबंध में ग्राम कुटेशर नगोई के ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरबा के नाम आवेदन प्रस्तुत कर मामले में हस्तक्षेप एवं उचित कार्रवाई की मांग की है।

आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित नाले में रेलवे द्वारा नाला छोड़ दिया गया है, लेकिन वहां पुलिया का निर्माण नहीं किया गया है। इसके कारण पानी के प्राकृतिक बहाव में परेशानी उत्पन्न हो रही है। आवेदन के अनुसार, इसी नाले से लगभग 500 मीटर ऊपर जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा की स्वीकृति के आधार पर ग्राम पंचायत कुटेशर नगोई द्वारा बांध बनाया गया, जिसके बाद नाले के पानी का बहाव कथित रूप से निजी भूमि की ओर कर दिया गया है।

पानी का बहाव बदलने से खेतों को नुकसान का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि बांध के नीचे नाले के हिस्से में गांव के ही 4-5 व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा किए जाने की बात भी आवेदन में उल्लेखित है। आरोप है कि नाले के पानी को निजी भूमि की ओर मोड़ दिए जाने से खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी पहुंच रहा है।

आवेदन में किसानों ने दावा किया है कि अधिक पानी भरने के कारण खेतों की फसल को लगभग 50 प्रतिशत तक नुकसान पहुंच चुका है, वहीं खेतों के मेड़ों में भी टूट-फूट होने लगी है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई गई है।

SDM को भी दिया जा चुका है आवेदन

आवेदन में उल्लेख है कि इस मामले को लेकर 10 अगस्त 2025 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पोड़ी-उपरोड़ा को भी आवेदन दिया गया था, लेकिन ग्रामीणों द्वारा अब जिला प्रशासन से पुनः हस्तक्षेप की मांग की गई है।

कलेक्टर से क्या मांग?

ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरबा से मांग की है कि संबंधित एजेंसी को निर्देशित कर नाले के पानी को पूर्व की तरह प्राकृतिक नाले में बहाने की व्यवस्था कराई जाए। साथ ही जिस स्थान पर रेलवे द्वारा नाला छोड़ा गया है, वहां पुलिया का निर्माण कराने के लिए रेलवे को निर्देशित किया जाए, ताकि पानी का बहाव बाधित न हो और किसानों की फसल एवं निजी भूमि को नुकसान से बचाया जा सके।

बड़ा सवाल

यदि आवेदन में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो सवाल यह उठता है कि नाले के प्राकृतिक बहाव को बदलने से पहले जल निकासी और पुलिया की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? वहीं नाले की भूमि पर कथित कब्जे की शिकायत भी जांच का विषय है।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर स्थल निरीक्षण और राजस्व/तकनीकी जांच कर क्या कार्रवाई करता है।

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