
न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)
पोड़ी उपरोड़ा// विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा की सिर्री पंचायत में बारिश का मौसम स्कूली बच्चों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। गांव और स्कूल के बीच आने वाली बम्हनी नदी पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ जाता है और बच्चों के सामने स्कूल पहुंचने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।
जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं बच्चे
बारिश के दौरान बम्हनी नदी में बाढ़ आने पर आवागमन का रास्ता बेहद कठिन हो जाता है। इसके बावजूद शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए बच्चे बाढ़ के पानी को पार कर स्कूल जाने के लिए मजबूर बताए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर नदी पार करते समय कोई बच्चा हादसे का शिकार हो गया तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
बाढ़ का तेज बहाव, फिसलन और पानी की गहराई बच्चों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों का इस तरह नदी पार करके स्कूल जाना उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
📚 शिक्षा के अधिकार और सुरक्षा—दोनों पर सवाल
सरकार बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन सिर्री पंचायत की स्थिति इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती नजर आती है।
स्कूल जाना बच्चों का अधिकार है, लेकिन क्या इसके लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ेगी?
यदि बरसात में नदी पार करना ही बच्चों की मजबूरी बन गया है तो प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई भी जारी रहे और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
❓ अब तक क्यों नहीं हुई ठोस पहल?
स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और संबंधित विभागों से है कि बम्हनी नदी पर पुल नहीं होने की समस्या लंबे समय से मौजूद है, तो अब तक स्थायी समाधान की दिशा में क्या कदम उठाए गए?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
क्या बारिश के दिनों में बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग, अस्थायी आवागमन व्यवस्था या अन्य शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जा सकती?
बच्चों का भविष्य अधर में, जवाबदेह कौन?
एक ओर शासन-प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर यदि बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए बाढ़ग्रस्त नदी पार करनी पड़ रही है तो यह बेहद गंभीर विषय है।
यह सिर्फ सड़क या पुल की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा मामला है।
प्रशासन को चाहिए कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थल का निरीक्षण कर बच्चों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करे और बम्हनी नदी पर स्थायी पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल शुरू करे।
सबसे बड़ा सवाल
बम्हनी नदी में बाढ़ के बीच अगर किसी मासूम के साथ अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या प्रशासन हादसे का इंतजार कर रहा है या बच्चों की सुरक्षा के लिए समय रहते कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
अब देखना होगा कि इस खबर के बाद क्या प्रशासन ठोस पहल करती है या फिर ये भी ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी।




