15 किलोमीटर दूर से PDS चावल लाने की मजबूरी! गउरबोरा से माखुरपानी तक ट्रैक्टर से ढुलाई, ग्रामीणों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
बीहड़ वनांचल क्षेत्र में राशन पहुंचाने की चुनौती, लंबी दूरी और जोखिम के बीच PDS चावल पहुंचाने का दावा

न्यूज दस्तक 24 की खास रिपोर्ट
कोरबा। जिले के ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर एक मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि गउरबोरा से माखुरपानी तक करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय कर PDS चावल ट्रैक्टर के माध्यम से लाना पड़ रहा है। लंबी दूरी, दुर्गम रास्ते और परिवहन की कठिनाइयों के बीच राशन पहुंचाने की इस प्रक्रिया ने स्थानीय व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, माखुरपानी तक PDS चावल पहुंचाने के लिए गउरबोरा से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में राशन को ट्रैक्टर में लादकर ले जाने की स्थिति बन रही है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राशन की नियमित और सुगम आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों की दैनिक खाद्यान्न जरूरतें PDS व्यवस्था पर निर्भर रहती हैं।
15 किलोमीटर की दूरी बनी चुनौती
गउरबोरा से माखुरपानी तक लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करना सामान्य परिस्थितियों में भी समय और संसाधन की मांग करता है। ग्रामीण क्षेत्र में यदि सड़क की स्थिति खराब हो या रास्ता दुर्गम हो, तो परिवहन की परेशानी और बढ़ सकती है। इसी वजह से ट्रैक्टर के जरिए चावल ले जाने की व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि राशन जैसी आवश्यक वस्तु को गांव तक आसानी से पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि हितग्राहियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।
“जान जोखिम में डालने” की बात पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि दुर्गम मार्ग से भारी मात्रा में चावल ट्रैक्टर में लादकर ले जाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में किसी दुर्घटना या वास्तविक नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग के निरीक्षण और आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
विभागीय व्यवस्था पर मांगा गया जवाब
अब सवाल यह है कि यदि माखुरपानी तक PDS चावल पहुंचाने के लिए वास्तव में करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है, तो क्या यह वर्तमान वितरण व्यवस्था का निर्धारित हिस्सा है या परिवहन व्यवस्था में कोई व्यावहारिक समस्या है? क्या संबंधित विभाग द्वारा दूरस्थ गांवों की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर नियमित परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था की गई है?
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि PDS चावल समय पर, सुरक्षित तरीके से और बिना अनावश्यक परेशानी के हितग्राहियों तक पहुंचे।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और मांखुरपानी तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।




