पोड़ी उपरोड़ा : ग्रामीणों का सब्र टूटा! जर्जर सड़क को लेकर गोंगपा का हल्ला बोल, प्रशासन को दिया अल्टीमेटम
न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)
पोड़ी उपरोड़ा/जटगा :- कोरबा जिले के पोंडी उपरोड़ा क्षेत्र में सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर अब सियासी और सामाजिक माहौल गरमाने लगा है। लंबे समय से जर्जर सड़क, जगह-जगह उभरे बड़े-बड़े गड्ढे, उड़ती धूल और आवागमन में बढ़ती परेशानी को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, ब्लॉक इकाई पसान ने प्रशासन के सामने जोरदार तरीके से मुद्दा उठाया है। पार्टी की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पोंडी उपरोड़ा को ज्ञापन सौंपकर सड़क की स्थिति में तत्काल सुधार कराने की मांग की गई है।

ज्ञापन में जटगा से अमलीकुंडा, लैंगा, बैरा , बेतलो सहित आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क की कथित जर्जर स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सड़क लंबे समय से खराब हालत में है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे उभर आने से वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गड्ढों में तब्दील सड़क, धूल बनी राहगीरों की मुसीबत

ज्ञापन में सड़क की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। आरोप है कि सड़क के कई हिस्सों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिसके चलते वाहन चालकों को बेहद सावधानी से आवागमन करना पड़ता है। वहीं सड़क से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण धूल उड़ने से आसपास रहने वाले ग्रामीणों और पैदल राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है, तो इसकी समय पर मरम्मत और देखरेख की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
गोंगपा ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क की वास्तविक स्थिति का स्थल निरीक्षण कराया जाए और मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के साथ शुरू कराया जाए।
“आश्वासन नहीं, अब चाहिए सड़क की मरम्मत”
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट चेतावनी दी है कि ग्रामीणों की समस्या को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से परेशानी झेल रही है और अब सड़क की वास्तविक स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
ज्ञापन में प्रशासन से सड़क की जर्जर स्थिति को ध्यान में रखते हुए जनहित में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई है।

10 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दे दी। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि यदि निर्धारित समय तक सड़क की समस्या के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई, तो 10 सितंबर 2026 को सड़क पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
पार्टी ने संकेत दिया है कि आंदोलन पूरी तरह जनसमस्या को लेकर होगा और इसके लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और सड़क की मरम्मत के लिए धरातल पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती है।
ग्रामीणों की परेशानी पर प्रशासन की नजर कब?
सड़क किसी भी क्षेत्र के विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। खराब सड़क का सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी, विद्यार्थियों के आवागमन, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, किसानों के आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता है। ऐसे में यदि सड़क लंबे समय तक जर्जर अवस्था में रहती है तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
गोंगपा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन ने प्रशासन के सामने एक बार फिर सड़क व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सड़क की मरम्मत के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा या उससे पहले ही जिम्मेदार विभाग जागेगा?
अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। ज्ञापन, सड़क की तस्वीरें और आंदोलन की चेतावनी सामने आने के बाद गेंद पूरी तरह प्रशासन के पाले में है। यदि समय रहते सड़क की स्थिति नहीं सुधरी तो 10 सितंबर का प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन इस मुद्दे को और व्यापक रूप दे सकता है।
**हालांकि सड़क की जर्जरता, मरम्मत में देरी और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।**




