
न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)
कोरबा// जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत मानदेय भृत्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद की स्थिति सामने आई है। पूर्व में मानदेय भृत्य के रूप में कार्य कर चुके दुर्गा लाल ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों के साथ ही जिलाधीश कोरबा को भी आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आवेदक का आरोप है कि उन्होंने पूर्व के सत्रों में लगातार मानदेय भृत्य के रूप में सेवा दी और नए सत्र 2026-27 के लिए भी नियमानुसार आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई और उनकी जगह दूसरे व्यक्ति की भर्ती कर दी गई।
पूर्व में कार्य करने के बावजूद नहीं मिली प्राथमिकता का आरोप
दुर्गा लाल के अनुसार, उन्होंने सत्र 2024-25 से पूर्व के कार्यकाल सहित लगभग दो सत्रों तक मानदेय भृत्य के रूप में कार्य किया था। उनका दावा है कि भर्ती के नियमों में पूर्व में कार्य कर चुके एवं अनुभवी व्यक्तियों को प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान है।
आवेदक का कहना है कि पूर्व अनुभव होने के बावजूद नए सत्र की भर्ती में उनकी अनदेखी की गई। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि पूर्व में कार्यरत और अनुभवी व्यक्ति को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी तो भर्ती नियमों में प्राथमिकता के प्रावधान का क्या औचित्य रह जाता है?
समय पर आवेदन नहीं करने वाले व्यक्ति की नियुक्ति का भी आरोप
आवेदन में गंभीर आरोप लगाते हुए दुर्गा लाल ने दावा किया है कि जिस व्यक्ति को नियुक्त किया गया, उसने कथित तौर पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत नहीं किया था। इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति को नियुक्ति दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
हालांकि, इस संबंध में नियुक्ति करने वाले अधिकारियों और संबंधित विभाग का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्कूल में कार्य करने के बाद हटाए जाने का दावा
आवेदन के अनुसार, दुर्गा लाल ने शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला उचलेंगा में भी 14 जून 2026 से 27 जून 2026 तक मानदेय भृत्य के रूप में कार्य करने का उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि कार्य करने के बाद उन्हें हटाकर दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई, जिसे लेकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है।
जिलाधीश कोरबा से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को लेकर दुर्गा लाल ने अब जिलाधीश कोरबा को भी आवेदन देकर भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि भर्ती से जुड़े दस्तावेजों, आवेदन की तिथियों, पात्रता एवं प्राथमिकता संबंधी नियमों की जांच की जाए।
आवेदक ने मांग की है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और पात्र व्यक्ति को न्याय दिलाया जाए।
बड़ा सवाल—
दो साल तक सेवा देने वाले पूर्व मानदेय भृत्य को आखिर प्राथमिकता क्यों नहीं मिली?
क्या भर्ती प्रक्रिया में प्राथमिकता संबंधी नियमों का पालन हुआ?
जिस व्यक्ति की नियुक्ति की गई, क्या उसका आवेदन नियमानुसार और समय-सीमा के भीतर प्रस्तुत किया गया था?
इन तमाम सवालों के जवाब अब विभागीय जांच और संबंधित अधिकारियों के पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
फिलहाल आरोपों के घेरे में भर्ती प्रक्रिया
वर्तमान में यह पूरा मामला आवेदक द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके आवेदन पर आधारित है। भर्ती प्रक्रिया में वास्तव में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नियुक्ति नियमानुसार की गई है, इसका अंतिम निष्कर्ष सक्षम अधिकारियों की जांच के बाद ही सामने आएगा। अब देखने वाली बात होगी कि जिलाधीश कोरबा इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और मामले की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




