कलेक्टर के सख्त निर्देशों का रावा उप स्वास्थ्य केंद्र पर क्या होगा असर? RHO की लगातार अनुपस्थिति के आरोपों के बीच स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल स्वास्थ्य केंद्र समय पर खोलने और चिकित्सक-स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के आदेश, अब रावा उप स्वास्थ्य केंद्र में होगी कार्रवाई या फिर जारी रहेगी लापरवाही?

न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)
कोरबा। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत लगातार स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा कर रहे हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे रहे हैं कि सभी स्वास्थ्य केंद्र निर्धारित समय पर खुलें तथा चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी अपनी ड्यूटी के दौरान अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। लेकिन कलेक्टर के इन सख्त निर्देशों के बीच रावा उप स्वास्थ्य केंद्र में RHO की कथित लगातार अनुपस्थिति की शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि रावा उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ RHO की लगातार अनुपस्थिति को लेकर क्षेत्र में शिकायतें सामने आती रही हैं। इस संबंध में समाचार के माध्यम से जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी तक भी मामला पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक विभाग की ओर से किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिले के मुखिया कलेक्टर स्वयं स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए लगातार समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दे रहे हैं, तब जमीनी स्तर पर इन आदेशों का कितना प्रभावी पालन हो रहा है?
कलेक्टर ने साफ कहा—समय पर खुलें स्वास्थ्य केंद्र
31 अगस्त 2026 को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के सभी अस्पतालों में चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी समय पर उपस्थित रहें और मरीजों को नियमित रूप से उपचार उपलब्ध कराया जाए।
कलेक्टर ने विशेष रूप से उप स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को निर्धारित समय पर खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई स्वास्थ्य केंद्र समय पर नहीं खुलता है या स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
रावा उप स्वास्थ्य केंद्र पर अब सबकी नजर
कलेक्टर के इस आदेश के बाद अब लोगों की नजर रावा उप स्वास्थ्य केंद्र पर टिक गई है। लगातार अनुपस्थिति की शिकायतों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग वहां की वास्तविक स्थिति की जांच करता है या नहीं।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के अनुसार, यदि स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से केंद्र में उपस्थित नहीं रहते हैं तो इसका सीधा असर ग्रामीणों और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर पड़ सकता है। दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों की ओर जाना पड़ सकता है।
खबर पहुंचने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संबंधित मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है, तो कथित लापरवाही की जांच और कार्रवाई को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं है?
एक ओर कलेक्टर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हमर स्वस्थ छत्तीसगढ़ योजना के तहत सितंबर माह तक शत-प्रतिशत स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण में प्रगति और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति संबंधी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आदेश का पालन होगा या केवल बैठकों तक सीमित रहेंगे निर्देश?
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने साफ कर दिया है कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा उप स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर नियमित रूप से संचालित हों।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रावा उप स्वास्थ्य केंद्र में RHO की अनुपस्थिति संबंधी शिकायतों की गंभीरता से जांच होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेंगे? और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है तो क्या संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई होगी?
कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। रावा उप स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले दिनों में व्यवस्था सुधरती है या नहीं, यह तय करेगा कि प्रशासन के आदेश वास्तव में जमीन पर उतर रहे हैं या फिर केवल विभागीय बैठकों और निर्देशों तक सीमित हैं।




