
न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)
कोरबा//पोड़ी उपरोड़ा
ग्राम सिरमिना, विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत डौकाबुड़ा डेम इन दिनों ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह डेम सिंचाई विभाग द्वारा बनाया गया है, लेकिन निर्माण के बाद से इसकी नियमित देखरेख और निरीक्षण को लेकर विभागीय स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।

बताया जा रहा है कि डेम के दोनों गेट लंबे समय से पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिसके कारण बारिश के दौरान डेम में लगातार बढ़ रहे जलस्तर को नियंत्रित करने में परेशानी हो रही है। डेम में पानी अधिक होने के कारण पानी खेतों और फसलों में भरने लगा है। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर पानी ग्रामीणों के घरों तक पहुंचने की स्थिति बन गई है, जिससे लोगों में भय और चिंता का माहौल है।
खेतों में भरा पानी, फसल बर्बादी का खतरा
डेम का पानी खेतों में भरने से किसानों की मेहनत पर संकट मंडराने लगा है। यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते डेम के गेटों का संचालन कर पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
निर्माण के बाद विभाग ने नहीं ली सुध?
ग्रामीणों का आरोप है कि डेम बनने के बाद से सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा नियमित रूप से डेम का अवलोकन एवं निरीक्षण नहीं किया गया। देखरेख के अभाव में डेम के दोनों गेट बंद पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि डेम की नियमित निगरानी की जा रही थी, तो बारिश के मौसम से पहले गेटों और जल निकासी व्यवस्था की जांच क्यों नहीं की गई?
ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग एवं प्रशासन से मांग की है कि मौके पर तत्काल जिम्मेदार अधिकारियों की टीम भेजकर डौकाबुड़ा डेम का निरीक्षण कराया जाए, बंद पड़े दोनों गेटों की तकनीकी जांच कर उन्हें चालू कराया जाए तथा अतिरिक्त पानी की सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल फसल नुकसान तक सीमित नहीं है। यदि डेम का जलस्तर और बढ़ता है तथा पानी घरों में प्रवेश करता है, तो जन-धन की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
बड़ा सवाल: हादसे का इंतजार कर रहा विभाग?
डौकाबुड़ा डेम की मौजूदा स्थिति ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर डेम के दोनों गेट बंद क्यों हैं? बारिश से पहले गेटों की जांच और मरम्मत क्यों नहीं की गई? क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को डेम की वर्तमान स्थिति की जानकारी है? और यदि जानकारी है, तो अब तक आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थल निरीक्षण कर पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों की फसल और ग्रामीणों के घरों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।




