Welcome to News Dastak 24   Click to listen highlighted text! Welcome to News Dastak 24
छत्तीसगढ़रायगढ़

रायगढ़ : पथरीली पहाड़ियों को हराभरा बनाने रायगढ़ वन विभाग की अभिनव पहल* *खरसिया के बोतल्दा में 5 हेक्टेयर क्षेत्र में 5 हजार पौधों का प्रायोगिक रोपण, चट्टानों के बीच वैज्ञानिक तकनीक से तैयार हो रहा हरित क्षेत्र*

 

 

 

न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)

रायगढ़, 11 अगस्त 2026/ खरसिया वन परिक्षेत्र के बोतल्दा स्थित पथरीले और खाली पहाड़ी क्षेत्र को हराभरा बनाने की दिशा में रायगढ़ वन विभाग द्वारा अभिनव पहल की गई है। वन विभाग ने बोतल्दा के कक्ष क्रमांक 1147 में लगभग 5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रायोगिक वृक्षारोपण शुरू किया है। इस पहल के तहत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्थल की प्रकृति के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हुए करीब 5 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। यह कार्य प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय के निर्देशन तथा मुख्य वन संरक्षक श्री मनोज कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

पथरीली पहाड़ियों पर पौधों के रोपण और उनके संरक्षण के लिए स्थल की प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष उपाय किए गए हैं। ढलान वाले क्षेत्रों में वर्षाजल के बहाव को नियंत्रित करने, मिट्टी के कटाव को रोकने और नमी बनाए रखने के लिए कंटूर रेखाओं के अनुरूप पत्थरों की मेड़ें तैयार की गई हैं। वहीं चट्टानों की दरारों और प्राकृतिक गड्ढों का उपयोग पौधरोपण के लिए किया जा रहा है। जहां चट्टानों के कारण मृदा की उपलब्धता बेहद कम है, वहां विशेष तकनीक अपनाते हुए चट्टानों के बीच टिन का घेरा तैयार कर उसमें उपयुक्त मृदा भरकर पौधों का रोपण किया जा रहा है। इससे पौधों की जड़ों को विकसित होने के लिए आवश्यक मृदा उपलब्ध हो रही है। इस प्रकार कठिन एवं अनुपयुक्त माने जाने वाले पथरीले स्थलों को भी पौधरोपण के लिए उपयोगी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

*स्थल के अनुरूप मिश्रित प्रजातियों का रोपण*

 

प्रायोगिक रोपण के अंतर्गत पीपल, हल्दू, नीम, कुसुम, बरगद, करंज और कुल्लू सहित विभिन्न स्थल-अनुकूल प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं। जैव विविधता और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मिश्रित प्रजातियों का चयन किया गया है। खुले एवं दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में लगाए गए पौधों को पशुओं से सुरक्षित रखने के लिए फेंसिंग की गई है। पौधों को प्रारंभिक अवस्था में मजबूती प्रदान करने के लिए बाँस स्टेकिंग की व्यवस्था भी की गई है। पौधों की स्थापना के बाद उनके संरक्षण और बेहतर वृद्धि पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए समय-समय पर निंदाई-गुड़ाई, आवश्यकतानुसार सिंचाई तथा कीट एवं रोग नियंत्रण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। वन अमले द्वारा रोपित पौधों की नियमित निगरानी और देखभाल सुनिश्चित की जा रही है।

 

*निरीक्षण के दौरान पीसीसीएफ ने किया पौधरोपण*

 

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर रोपण स्थल का निरीक्षण कर कार्य की गुणवत्ता, पौधों की स्थिति और प्रगति की समीक्षा की जा रही है। स्थानीय वन अमला भी स्थल की निगरानी और पौधों के संरक्षण में सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। स्थल निरीक्षण के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत स्वयं पौधा रोपित किया। उन्होंने प्रायोगिक रोपण की कार्यप्रणाली और पौधों के संरक्षण के लिए किए जा रहे उपायों का अवलोकन भी किया। वन विभाग का यह प्रयोग कठिन एवं पथरीले भू-भाग में हरित आवरण विकसित करने की संभावनाओं को तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि प्रयोग के अपेक्षित सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं, तो इसी तरह की तकनीकों को प्रदेश के अन्य पथरीले एवं दुर्गम वन क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकेगा। इससे ऐसे क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने, मृदा एवं जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय पारिस्थितिकी को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!