पोड़ी उपरोड़ा : बीहड़ वनांचल क्षेत्र के आदिवासी नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
विद्यालय के दरवाजे पर लटका मिला ताला, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पोड़ी-उपरोड़ा। कोरबा जिले के विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा के बीहड़ वनांचल क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दूरस्थ एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के नौनिहालों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था की तस्वीर इन दावों से अलग नजर आने का आरोप सामने आया है।
धवलपुर पंचायत के आश्रित ग्राम कुकरी बहरा स्थित प्राथमिक विद्यालय के बंद पाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि वनांचल क्षेत्र में रहने वाले गरीब एवं आदिवासी परिवारों के बच्चे शिक्षा के लिए इसी सरकारी विद्यालय पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि विद्यालय निर्धारित समय पर नहीं खुलता अथवा शिक्षक विद्यालय से अनुपस्थित रहते हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।
शिक्षा का अधिकार, लेकिन विद्यालय ही बंद मिले तो पढ़ेंगे कैसे?
वनांचल क्षेत्र के बच्चों के लिए स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि उनके भविष्य की उम्मीद है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे कठिन परिस्थितियों के बावजूद विद्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में विद्यालय बंद मिलने की स्थिति ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण कई बार शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। हालांकि विद्यालय बंद रहने के वास्तविक कारण, संबंधित शिक्षक की उपस्थिति तथा विभागीय रिकॉर्ड की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि शिक्षा विभाग से होना बाकी है।
जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विद्यालय वास्तव में निर्धारित समय में बंद पाया गया, तो संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और निगरानी किस प्रकार की जा रही है? क्या विद्यालयों की उपस्थिति व्यवस्था की नियमित जांच होती है? क्या अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जाती है? और यदि कार्रवाई होती है तो उसका असर जमीनी स्तर पर क्यों दिखाई नहीं देता?
दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शासन द्वारा संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे में विद्यालयों का नियमित संचालन सुनिश्चित करना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
नौनिहालों के भविष्य का सवाल, अब कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों ने मांग की है कि कुकरी बहरा प्राथमिक विद्यालय की स्थिति की संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके पर जांच कराई जाए। विद्यालय के खुलने-बंद होने का समय, शिक्षक की उपस्थिति, उपस्थिति पंजी तथा विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सहित अन्य रिकॉर्ड की जांच की जाए। यदि जांच में लापरवाही या अनधिकृत अनुपस्थिति सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि वनांचल क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना उनके भविष्य के साथ अन्याय होगा। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई करता है।
सवाल यही है—जब शासन बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए प्रयास कर रहा है, तो क्या स्कूल की चौखट पर ही उनकी शिक्षा का रास्ता बंद हो जाएगा?




