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कोरबाक्राइमछत्तीसगढ़

पोड़ी उपरोड़ा: समय से पहले स्कूल बंद करने और मासूम बच्चों से काम कराने के आरोप, फिर भी शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं! शिकायतें खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचीं, लेकिन कार्रवाई अब भी शून्य—शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

 

 

न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)

पोड़ी उपरोड़ा/कोरबा। विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलई डांड़, संकुल कारीमाटी एवं प्राथमिक विद्यालय लैंगा में शिक्षकों की कथित लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दोनों विद्यालयों को लेकर सामने आई शिकायतों में जहां एक ओर निर्धारित समय से पहले स्कूल बंद कर दिए जाने और स्कूल बंद होने कारण बच्चे बाहर भीगते हुए तथा बारिश थमने का इंतजार करते हुए, वहीं दूसरी ओर लैंगा स्कूल में मासूम स्कूली बच्चों से पानी भराने जैसे काम कराए जाते पाए गए हैं।

सबसे अहम बात यह है कि इन मामलों की जानकारी शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद अब तक संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध किसी ठोस कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।

तिलई डांड़ स्कूल में समय से पहले विद्यालय बंद करने का आरोप

तिलई डांड़ प्राथमिक शाला को लेकर शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विद्यालय को निर्धारित समय से पहले बंद कर दिया गया, जबकि उस समय कुछ बच्चे विद्यालय के बाहर मौजूद थे। बारिश के दौरान बच्चों के भीगने की स्थिति की बात भी सामने आई है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह विद्यालय संचालन की गंभीर लापरवाही मानी जा सकती है।

सवाल यह है कि विद्यालय का निर्धारित समय समाप्त नहीं हुआ था, तो स्कूल समय से पहले बंद क्यों किया गया? क्या इस मामले की मौके पर जांच की गई? यदि जांच हुई तो जिम्मेदार कौन पाया गया?

लैंगा प्राथमिक शाला में मासूम बच्चों से काम कराने का आरोप

वहीं प्राथमिक शाला लैंगा में भी बच्चों से पानी भराने जैसे कार्य कराए जाने की शिकायत सामने आई थी। बच्चों को पढ़ाई के लिए विद्यालय भेजा जाता है, ऐसे में उनसे इस तरह के कार्य कराए जाने के आरोप ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि बच्चों से पढ़ाई के समय इस प्रकार के काम कराए गए हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।

शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचीं, फिर कार्रवाई कहां है?

इन मामलों की शिकायत खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। गौरतलब है कि पत्रकारों के माध्यम से भी जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में जाकर मामले से अवगत कराया गया। इसके बावजूद अभी तक कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

जब शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच चुकी थीं, तो जांच क्यों नहीं हुई?

यदि जांच हुई, तो उसका निष्कर्ष क्या रहा?

यदि आरोप सही पाए गए, तो जिम्मेदार शिक्षकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

और यदि आरोप गलत पाए गए, तो शिकायतकर्ताओं को जांच का परिणाम क्यों नहीं बताया गया?

‘कार्रवाई शून्य’ होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

शिक्षा विभाग लगातार स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, समय पर विद्यालय संचालन और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की बात करता है। लेकिन जमीनी स्तर पर यदि इस तरह की शिकायतें सामने आती हैं और शिकायतों के बाद भी कार्रवाई स्पष्ट नहीं होती, तो निश्चित रूप से विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल विद्यालय में उपस्थित होना नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। यदि कोई शिक्षक निर्धारित समय से पहले विद्यालय बंद करता है या बच्चों से पढ़ाई के बजाय अन्य कार्य करवाता है, तो ऐसे मामलों में विभाग को गंभीरता से जांच कर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा है मामला

विद्यालय बच्चों के भविष्य की पहली सीढ़ी है। प्राथमिक स्तर पर बच्चों को मिलने वाली शिक्षा और वातावरण उनके आगे के शैक्षणिक जीवन की नींव तैयार करता है। ऐसे में विद्यालय का समय से पहले बंद होना या बच्चों से गैर-शैक्षणिक कार्य कराने की शिकायतें केवल प्रशासनिक लापरवाही का विषय नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकार और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है।

यदि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है और लापरवाही करने वालों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहन मिलने की आशंका भी बनी रहती है।

अब शिक्षा विभाग से जवाब की मांग

क्षेत्रवासियों और शिकायतकर्ताओं ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि दोनों विद्यालयों की शिकायतों की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराई जाए। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि आरोप सही नहीं हैं तो जांच का वास्तविक निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाए।

अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इन गंभीर शिकायतों पर कब तक कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी शिकायत, जांच और कार्रवाई के इंतजार के बीच ही फाइलों में दबकर रह जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल

शिकायत अधिकारियों तक पहुंची, मामला सामने आया, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

क्या शिक्षा विभाग बच्चों से जुड़े मामलों में भी किसी बड़ी कार्रवाई का इंतजार कर रहा है?

अब निगाहें शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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