बनखेता में मुआवजे को लेकर किसानों का फूटा आक्रोश! प्रभावित जमीन की घेराबंदी कर दी चेतावनी—“मुआवजा नहीं तो काम नहीं”
पोड़ी उपरोड़ा में गरमाया मुआवजे का मुद्दा, किसानों ने उग्र आंदोलन का किया ऐलान; जमीन की बाउंड्री घेरकर जताया विरोध

न्यूज दस्तक 24 की खास रिपोर्ट
पोड़ी उपरोड़ा। विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत बनखेता में किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का मामला लगातार गरमाता नजर आ रहा है। मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित किसानों में नाराजगी सामने आई है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन प्रभावित होने के बावजूद अभी तक उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिली है।

मुआवजा नहीं मिलने से नाराज किसानों ने अब अपना विरोध और अधिक स्पष्ट करते हुए प्रभावित जमीन की बाउंड्री घेर दी है। किसानों का कहना है कि जब तक उनके मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक प्रभावित भूमि पर काम आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
“पहले मुआवजा, फिर काम”—किसानों का दो टूक संदेश
किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक काम नहीं चलने देंगे।” उनका कहना है कि जमीन उनकी आजीविका से जुड़ी है और भूमि प्रभावित होने के बाद मुआवजा मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण है।
प्रभावित जमीन की घेराबंदी को किसानों ने अपने विरोध और चेतावनी के रूप में बताया है। उनका कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग को उनकी समस्या का समाधान करना चाहिए, ताकि विवाद की स्थिति आगे न बढ़े।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
मुआवजे के भुगतान में कथित देरी को लेकर किसानों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
किसानों के इस रुख के बाद अब प्रशासन के सामने मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की चुनौती है। ग्रामीणों का कहना है कि बातचीत के माध्यम से मुआवजे से जुड़ी स्थिति स्पष्ट की जाए और प्रभावित किसानों को उनका अधिकार दिलाया जाए।
बाउंड्री घेरकर रोका काम? प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती
प्रभावित जमीन की बाउंड्री घेरकर किसानों द्वारा दी गई चेतावनी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित कार्य आगे किस तरह चलेगा। किसानों का कहना है कि मुआवजा मिलने से पहले वे जमीन पर काम नहीं होने देंगे।
यदि किसानों और संबंधित विभाग के बीच जल्द सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कितना मुआवजा, किस आधार पर और कब होगा भुगतान?
मामले में अब कई सवाल सामने आ रहे हैं—प्रभावित किसानों की संख्या कितनी है? उनकी कितनी जमीन प्रभावित हुई है? मुआवजा राशि कितनी निर्धारित की गई है? भुगतान में देरी की वास्तविक वजह क्या है? और किसानों को मुआवजा कब तक मिलेगा?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब संबंधित विभाग और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष से ही सामने आ सकेगा।
फिलहाल बनखेता में माहौल गरमाया हुआ है। प्रभावित किसानों ने जमीन की घेराबंदी कर अपना विरोध दर्ज कराया है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि—
“मुआवजा नहीं तो काम नहीं!”
अब देखना होगा कि किसानों की इस चेतावनी के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं और मुआवजे के मुद्दे का समाधान कब तक हो पाता है।




