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स्कूल बंद, शिक्षक व्यवस्था पर सवाल और संकुल प्रभारी भी मिले नदारद नहीं!…..

विशेष रिपोर्ट NEWS DASTAK 24

बीहड़ वनांचल क्षेत्र सेन्हा/कुंकरी बहरा :-  बीहड़ वनांचल क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शासकीय विद्यालयों के संचालन और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुंकरी बहरा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला के बंद रहने की जानकारी सामने आने के बाद जब पूरे मामले की पड़ताल की गई, तो शिक्षकों की व्यवस्था से लेकर संकुल स्तर की निगरानी तक कई सवाल सामने आए।

स्थानीय स्तर पर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी संबंध में जब सेन्हा संकुल प्रभारी भारत सिंह (CSC) से दूरभाष क्रमांक 7999246586 पर संपर्क कर जानकारी ली गई, तो उनके द्वारा कथित रूप से शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने की बात कही गई। बताया गया कि उन्होंने कहा कि “मेरे पास शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है, तो कहां से लाऊं, जिससे स्कूल संचालित हो?”

संकुल प्रभारी के इस कथित जवाब ने शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। यदि वास्तव में किसी शासकीय विद्यालय में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना किसकी जिम्मेदारी है? क्या इसकी जानकारी खंड शिक्षा अधिकारी को दी गई? क्या विभाग से अतिरिक्त शिक्षक की मांग की गई? और यदि विद्यालय शिक्षक के अभाव में बंद रहा, तो बच्चों की पढ़ाई का नुकसान किसकी जिम्मेदारी होगी?

जानकारी लेने पहुंचे तो संकुल प्रभारी भी नहीं मिले

मामले की संक्षिप्त जानकारी लेने और संबंधित अधिकारी का पक्ष जानने के उद्देश्य से जब प्रतिनिधि सेन्हा प्राथमिक विद्यालय पहुंचे, तो वहां संकुल प्रभारी भारत सिंह मौजूद नहीं मिले।

मौके पर मौजूद सेन्हा माध्यमिक विद्यालय के एक शिक्षक द्वारा जानकारी दिए जाने की बात सामने आई कि भारत सिंह सर एक अन्य शिक्षक के साथ दौरे पर गए हैं।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि यह दौरा किस उद्देश्य से था, किस क्षेत्र के लिए था और इसके संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या विभागीय कार्यक्रम निर्धारित था या नहीं। इन बिंदुओं की पुष्टि संबंधित शिक्षा अधिकारियों से होना बाकी है।

1 :- एक तरफ स्कूल संचालन पर सवाल, दूसरी तरफ शिक्षक व्यवस्था का अभाव

2 :- पूरे घटनाक्रम को एक साथ देखा जाए तो कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आते हैं।

एक ओर वनांचल क्षेत्र के विद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर समस्या बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर संबंधित संकुल स्तर पर विद्यालयों की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

क्या शिक्षक वास्तव में उपलब्ध नहीं थे?

यदि नहीं थे तो उनकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

क्या विद्यालय बंद रखने की अनुमति थी?

क्या खंड शिक्षा अधिकारी को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी?

क्या विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होने की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई?

और यदि अधिकारी स्वयं दौरे पर थे, तो उस दौरे का उद्देश्य और विभागीय रिकॉर्ड क्या कहता है?

इन तमाम सवालों का जवाब शिक्षा विभाग की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

आदिवासी अंचल के बच्चों की शिक्षा का सवाल

यह मामला केवल एक विद्यालय के खुले या बंद रहने तक सीमित नहीं है। वनांचल क्षेत्रों में शासकीय विद्यालय ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का प्रमुख आधार हैं। ऐसे क्षेत्रों में यदि शिक्षक उपलब्ध नहीं होते या विद्यालय का नियमित संचालन प्रभावित होता है, तो विद्यार्थियों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं इस उम्मीद के साथ कि उन्हें नियमित रूप से शिक्षक और पढ़ाई मिलेगी। ऐसे में विद्यालय संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही की स्थिति सामने आती है तो उसकी गंभीरता से जांच किया जाना आवश्यक है।

“शिक्षक कहां से लाऊं?”—कथित जवाब ने बढ़ाई चिंता

संकुल प्रभारी से दूरभाष क्रमांक (7999246586) पर मिली जानकारी में कथित रूप से शिक्षकों की कमी का हवाला दिए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षकों की कमी की समस्या को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर क्या प्रयास किए गए?

यदि संकुल प्रभारी के पास पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, तो उन्हें उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी देकर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग करनी चाहिए थी या नहीं—यह भी जांच का विषय है।

किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी तय है। इसलिए पूरे मामले में केवल विद्यालय स्तर ही नहीं, बल्कि संकुल और उच्च विभागीय स्तर की कार्यप्रणाली की भी जांच जरूरी दिखाई देती है।

ग्रामीणों में बढ़ सकती है नाराजगी

वनांचल क्षेत्र में शिक्षा को लेकर पहले से ही अनेक चुनौतियां हैं। ऐसे में यदि विद्यालय में नियमित शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है, तो ग्रामीण अभिभावकों में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करें और यह पता लगाएं कि विद्यालय बंद क्यों रहा, शिक्षक कहां थे, क्या विभागीय अनुमति ली गई थी और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई थी या नहीं।

दस्तावेजों की जांच से सामने आएगा सच

पूरे मामले की वास्तविकता जानने के लिए केवल मौखिक बयानों के बजाय विद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच आवश्यक होगी। उपस्थिति पंजी, शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर, निरीक्षण पंजिका, विद्यालय संचालन से संबंधित रिकॉर्ड, संकुल स्तर के दौरा रजिस्टर तथा अधिकारियों को भेजी गई सूचनाओं की जांच से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।

यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि विद्यालय बंद रहने या शिक्षक के अनुपस्थित रहने के पीछे कोई वैध प्रशासनिक कारण सामने आता है, तो उसे भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

 

अब सवाल शिक्षा विभाग से—जवाब कब?

कंकरी बहरा शासकीय प्राथमिक शाला के संचालन से जुड़े आरोप, शिक्षकों की कमी को लेकर संकुल प्रभारी का कथित बयान और सेन्हा प्राथमिक विद्यालय में उनके मौके पर नहीं मिलने की जानकारी—इन सभी घटनाक्रमों ने वनांचल की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन आदिवासी एवं ग्रामीण बच्चों के भविष्य को बेहतर शिक्षा के माध्यम से मजबूत किया जाना चाहिए, उनकी पढ़ाई कहीं प्रशासनिक अव्यवस्था और शिक्षकों की कमी के बीच तो प्रभावित नहीं हो रही?

अब निगाहें शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों पर हैं कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या नहीं।

इस खबर में लगाए गए आरोपों और संकुल प्रभारी के कथित बयान की स्वतंत्र विभागीय पुष्टि अभी प्रतीक्षित है। संबंधित संकुल प्रभारी, खंड शिक्षा अधिकारी अथवा शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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