
न्यूज दस्तक 24 (एजेंसी)
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा, 14 अगस्त 2026।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच शराब सेवन और विद्यालय से अनुपस्थित रहने के मामले में सहायक शिक्षक राजेश कुमार बंजारे के निलंबन की कार्रवाई ने एक बार फिर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा के प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा ने शासकीय प्राथमिक शाला आश्रम सरसोंका के सहायक शिक्षक राजेश कुमार बंजारे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
जारी आदेश के अनुसार, 5 अगस्त 2026 को शिक्षक के शराब के नशे में गांव में घूमने, शराब का सेवन करने तथा विद्यालय से अनुपस्थित रहने का वीडियो वायरल हुआ था। मामले में शिक्षक को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया, लेकिन निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्यालय से अधिक समय तक अनुपस्थित रहने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। विभाग ने शिक्षक के कृत्य को घोर लापरवाही, उदासीनता, स्वेच्छाचारिता एवं अनुशासनहीनता मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के विपरीत माना है।
इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 एवं 10 के तहत शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा निर्धारित किया गया है।
लेकिन अब बड़ा सवाल—अन्य मामलों में कार्रवाई कब?
एक मामले में विभाग द्वारा तत्काल निलंबन की कार्रवाई किए जाने के बाद अब पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र में सामने आए अन्य कथित लापरवाही के मामलों पर भी कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
क्षेत्र में पूर्व में शिक्षकों के विद्यालय से अनुपस्थित रहने, निर्धारित समय से पहले स्कूल बंद होने तथा विद्यार्थियों से विद्यालय की मूलभूत व्यवस्थाओं से जुड़े कार्य करवाए जाने जैसे मामले सामने आने का दावा किया गया है।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग सभी मामलों में एक समान कार्रवाई करेगा या कार्रवाई केवल उन्हीं मामलों तक सीमित रहेगी, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं?
क्या विभाग को हर कार्रवाई के लिए वीडियो का इंतजार है?
यदि किसी शिक्षक की अनुपस्थिति या लापरवाही से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है, तो विभागीय निरीक्षण, शिकायत और जांच के आधार पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
लेकिन यदि किसी मामले में शिकायत या आरोप सामने आने के बावजूद लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होती, तो इससे लापरवाह शिक्षकों के हौसले बुलंद होने की आशंका पैदा होती है।
कार्रवाई में अनदेखी या लापरवाह शिक्षकों को संरक्षण?
पोड़ी उपरोड़ा में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि कुछ मामलों में विभागीय कार्रवाई में देरी क्यों होती है?
क्या इसे लापरवाह शिक्षकों की खुशकिस्मती कहा जाए या फिर विभागीय कार्रवाई में अनदेखी?
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा उच्च अधिकारियों की मिलीभगत अथवा संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
फिर भी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका सीधा असर स्कूल आने वाले बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल
जब शराब सेवन और अनुपस्थिति के एक मामले में विभाग तत्काल कार्रवाई कर सकता है, तो पोड़ी उपरोड़ा के अन्य कथित लापरवाह शिक्षकों के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या शिक्षा विभाग सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर समान मापदंड के आधार पर कार्रवाई करेगा?
अब देखना होगा कि जिला शिक्षा विभाग इन सवालों का जवाब देता है या फिर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े ये सवाल फाइलों में ही दबे रह जाते हैं।




