सेमरा के दोनों स्कूलों में रसोइया नदारद! प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में बच्चों के सामने नाश्ते-भोजन का संकट…..

पसान/सेमरा। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय सेमरा में रसोइयों के विद्यालय नहीं पहुंचने की स्थिति सामने आने से बच्चों की भोजन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। दोनों विद्यालयों में रसोइया अनुपस्थित रहने के कारण नाश्ता एवं भोजन तैयार करने की व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही जा रही है, जिससे स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को भोजन के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बच्चों के लिए संचालित नाश्ता एवं मध्यान्ह भोजन योजना का उद्देश्य उन्हें विद्यालय में पढ़ाई के साथ नियमित पोषण उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि एक साथ प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय दोनों के रसोइया विद्यालय नहीं पहुंचते हैं, तो यह व्यवस्था की निगरानी और वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
दोनों विद्यालयों में व्यवस्था प्रभावित होने से उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दोनों विद्यालयों में रसोइया अनुपस्थित थे, तो बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या विद्यालय प्रबंधन को रसोइयों के नहीं आने की जानकारी पहले से थी? यदि जानकारी थी तो समय रहते बच्चों के नाश्ते एवं भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं की गई?
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी भोजन व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। भोजन के भरोसे स्कूल आने वाले जरूरतमंद बच्चों को यदि निर्धारित समय पर नाश्ता अथवा भोजन नहीं मिलता है, तो इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ सकता है।

जिम्मेदारों की निगरानी पर भी सवाल
एक ही स्थान पर संचालित प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में दोनों रसोइयों की अनुपस्थिति ने विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों और अभिभावकों की मांग है कि संबंधित अधिकारी पूरे मामले की वास्तविकता की जांच करें और यह स्पष्ट करें कि रसोइयों की अनुपस्थिति के बावजूद बच्चों के भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
फिलहाल मामले की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच एवं विद्यालय प्रबंधन के स्पष्टीकरण के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन इस घटना ने इतना जरूर सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों की थाली की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और रसोइया नहीं आने पर उनकी भोजन व्यवस्था कौन सुनिश्चित करेगा?




